January 31, 2023

मोकामा में कुर्मी-धानुक का विश्वास खोया, पुराना वोट बैंक गंवाया…बिहार में उपचुनाव में नीतीश ने क्या कुछ पाया

बिहार में हुए दो विधानसभा उप चुनाव के रिजल्ट आने के बाद तो यह साफ हो गया कि इस चुनावी दौड़ में नीतीश वोट बैंक की धमक नहीं दिखी।

बिहार में हुए दो विधानसभा उप चुनाव के रिजल्ट आने के बाद तो यह साफ हो गया कि इस चुनावी दौड़ में नीतीश वोट बैंक की धमक नहीं दिखी। हां, कुछ दिखा भी तो आरजेडी बनाम बीजेपी के बीच काफी संघर्षों वाली स्थिति। यह सच है कि केवल दो विधान सभा क्षेत्रों से पूरे बिहार की राजनीतिक तस्वीर खींचनी थोड़ी मुश्किल है। लेकिन जहां तक पैटर्न की बात करें तो यह साफ दिखता कि आगामी चुनाव में नीतीश फैक्टर काफी गौण हो जाएंगे। ऐसा कहने का आधार भी इसी गोपालगंज और मोकामा चुनाव के रिजल्ट के सापेक्ष देखा जा सकता है।

अब गोपालगंज विधान सभा चुनाव में वोटों का गणित बिठाया जाए तो इस बार बीजेपी को 70 हजार वोट आया है। लेकिन जेडीयू के साथ जब बीजेपी 2020 के विधानसभा चुनाव में लड़ी थी तो 78 हजार मत बीजेपी उम्मीदवार को मिले थे। यानी गत चुनाव से 8 हजार कम।

अब बीजेपी की स्थिति का आंकलन करें तो बीजेपी के विरुद्ध वैश्य जाति का उम्मीदवार आरजेडी ने उतारा। यह वैश्य समाज बीजेपी का कोर वोटर है जो 2020 के चुनाव में बीजेपी के पक्ष में वोट किया था। इस चुनाव में स्थिति यह है कि बीजेपी के विरुद्ध वैश्य जाति के उम्मीदवार को आरजेडी ने उतारा। अगर यह मान लें कि बीजेपी के इस कोर वोट का 40 प्रतिशत भी आरजेडी में गया होगा तो बीजेपी के वोट में इस उप चुनाव में कमी आनी चाहिए।

मोकामा विधानसभा उप चुनाव की बात करें तो जेडीयू और बीजेपी के उम्मीदवार बने राजीव लोचन जी को लगभग 41 हजार मत मिले थे और आरजेडी के उम्मीदवार अनंत सिंह को 78 हजार मत मिले थे। इस बार महागठबंधन के उम्मीदवार बने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को लगभग 79 हजार मिले। वहीं दूसरी तरफ 27 वर्षों के बाद चुनाव में उतरी बीजेपी को 62 हजार मत मिले। यहां भी नीतीश फैक्टर सवालों के घेरे में है। वोट तो महागंठबंधन के उम्मीदवार नीलम देवी का बढ़ना चाहिए था, लेकिन बढ़ा बीजेपी का। यहां भी नीतीश फैक्टर की धमक नहीं दिखती है।

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