October 5, 2022

किसान आंदोलन, हिजाब विवाद, जुमा हिंसा… यूपी में गहरी हैं पीएफआई की जड़ें!

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उत्तर प्रदेश में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। देश के 11 राज्यों में छापेमारी चल रही है। इस क्रम में यूपी में छापेमारी के क्रम में 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।...

उत्तर प्रदेश में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। देश के 11 राज्यों में छापेमारी चल रही है। इस क्रम में यूपी में छापेमारी के क्रम में 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। लखनऊ से यूपी एटीएस ने छापेमारी कर इंदिरा नगर से एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। उसकी निशानदेही पर एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है। वहीं, वाराणसी से दो लोगों को पकड़ा गया है। प्रदेश में पीएफआई की गतिविधियों को ध्यान से देखें तो आप पाएंगे कि हाल के दिनों में पीएफआई की लगभग हर बड़े मामले में संलिप्तता की बात सामने आई है। हाथरस कांड के बाद मचे बवाल में पीएफआई के हाथ होने की सूचना मिली थी। इसके अलावा हिजाब कांड हो या फिर ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कोर्ट का फैसला, पीएफआई ने इन मामलों को भड़काने की कोशिश की। नुपुर शर्मा विवाद के बाद जुमे पर यूपी में भड़की हिंसा के मामले में भी पीएफआई कनेक्शन सामने आया था।

हाथरस कांड के दौरान आया था सीएफआई का नाम
यूपी में हाथरस कांड के दौरान सीएफआई का नाम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने हाथरस दंगों की साजिश में पीएफआई और उसके स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के पांच सदस्यों के खिलाफ लखनऊ की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था। ईडी की ओर से जिनके खिलाफ चार्जशीट दायर की गई, उनमें सीएफआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतिकुर रहमान, सीएफआई दिल्ली के महासचिव मसूद अहमद, पत्रकार सिद्धिकी कप्पन और मोहम्मद आलम शामिल थे। जांच के दौरान पता चला था कि हाथरस में दंगें करवाने की पूरी साजिश सीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव केए राउफ शरीफ ने तैयार की थी। सभी उसी के इशारे पर हाथरस जा रहे थे। हाथरस कांड में पीएफआई की संलिप्तता के बाद राज्य सरकार ने संगठन को गंभीरता से लेना शुरू किया।

किसान आंदोलन के दौरान भी उछला था नाम
पीएफआई का नाम किसान आंदोलन के दौरान भी उछला था। खुफिया एजेंसियों को किसान आंदोलन के दौरान पीएफआई की ओर से हिंसा का इनपुट मिला था। इसके बाद मेरठ समेत कई स्थानों पर पीएफआई के ठिकानों पर छापे मारे गए थे। पीएफआई और एसडीपीआई की ओर से इस दौरान हिंसा फैलाने की कोशिश का मामला सामने आया था।

हिजाब विवाद में भी आया नाम
हिजाब विवाद में भी पीएफआई का नाम सामने आया था। कर्नाटक के एक शैक्षणिक संस्थान से शुरू हुए हिजाब विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की गई। यूपी के विभिन्न शहरों में युवाओं को भड़काने में पीएफआई के संगठन एसडीपीआई की भूमिका सामने आई। गाजियाबाद से लेकर प्रयागराज तक के शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को भड़काने का प्रयास किया गया। इस मामले में सीएम योगी ने साफ कर दिया था कि शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित ड्रेस कोड के आधार पर ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।

क्या है पीएफआई?
दक्षिण भारत परिषद नामक एक मंच का गठन 26 जनवरी 2004 को बेंगलुरु में किया गया। बेंगलुरु में हुई बैठक में कर्नाटक से फोरम फॉर डिग्निटी, केरल से नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट और तमिलनाडु से मनिथा नीथी पासराय शामिल हुए। बाद में इस मंच को विस्तारित करने का निर्णय लिया गया। 22 नवंबर 2006 को केरल के कालीकट में मंच की बैठक हुई। इस बैठक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को लॉन्च करने का निर्णय लिया गया। देश के 23 राज्यों में पीएफआई के विस्तार की बात कही जाती है। हालांकि, इस संगठन से जुड़े सदस्यों को लेकर पीएफआई कोई जानकारी नहीं देता है।

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