यूट्यूबर और पत्रकार पर मुकदमा दर्ज, सिलक्यारा सुरंग हादसे से प्रभावित मजदूर के घर की दुर्दशा दिखाई थी ।

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नई दिल्ली ।

नागरिक अखबार द्वारा साझा की गई एक खबर के मुताबिक, उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग में 41 मजदूर 17 दिनों तक फंसे रहे। 17 दिन जीवन-मरण के द्वंद से जूझते मजदूर अंततः सकुशल बाहर निकाल लिये गये। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वाहवाही लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। स्वयं प्रधानमंत्री ने मौका गंवाये बिना मजदूरों से फोन पर बात की।
इस वाहवाही में सारे गंभीर सवाल दबा दिये गये। एक सवाल तो ये है कि क्यों निरंतर मजदूरों की जान उत्तराखंड में जोखिम में डाली जा रही है।

मजदूरों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को ही क्यों जोखिम में डाला जा रहा है। दूसरा सवाल ये है कि इन 41 मजदूरों सहित पूरे देश के मजदूरों के हालात क्यों दयनीय बने हुए हैं। इस सवाल से मोदी सरकार तो क्या हर पूंजीवादी सरकार बचती रहती है। यह सवाल सरकार के लिए इतना अप्रिय है कि इस पर वह कुछ भी सुनने, कहने को तैयार नहीं है। हाल ही में, झारखंड के एक खूटी जिले के एक यूटयूबर और एक स्थानीय पत्रकार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इन युवकों का दोष इतना था कि उन्होंने 41 मजदूरों में से एक मजदूर के घर की दुर्दशा दिखाई। इन दोनों युवकों की बातें शासन को इतनी नागवार गुजरी कि उसने उन पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कर दिया।


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