August 9, 2022

शुरू हुआ एशिया के दो देशो में घमासान युद्ध ,पैदा हुई तनावग्रस्त स्तिथि

1 min read
इलाके में तैनात रूस की शांति सेना ने अजरबैजान के सैनिकों के तीन बार संघर्ष विराम उल्लंघन करने की जानकारी दी है.दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने वाले रूस ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान ने नागर्नो-कराबाख के विवादित इलाके में समझौते को तोड़ा है.

एक तरफ जंहा रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है, वही इस युद्ध के परिणामस्वरूप कई लोगों की जान चली गई और लाखों लोग बेघर हो गए और उन्हें पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. हाल ही में चीन और ताइवान में भी अब युद्ध के आसार देखे जा रहे है क्योंकी चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है ,ऐसे में उसे गवारा नहीं की ताइवान स्वतंत्र देश बने. जहां एक तरफ देश में तनाव बना हुआ है युद्ध का माहोल है इसी के साथ दुनिया के दो अन्य देशों में भी अब जंग की शुरुवात हो चुकी है,और वहां पर बम बरसाए जा रहे है. कई सैनिकों ने अपनी जान तक गवां दी है परन्तु वहां अभी तक युद्ध जारी है.

एशिया में बसे दो पडोसी देश अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जग शुरू हो गयी जो यूरोप के बिल्कुल करीब हैं भारत से करीब चार हजार किमी.की दूरी पर मौजूद है और ईरान और तुर्की के बीच में आते हैं.

नागोर्नो-करबाख को लेकर छिड़ी है जग
सोवियत संघ से अलग हुए मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान और ईसाई बहुल आर्मेनिया में नागोर्नो-करबाख को लेकर लड़ाई छिड़ी हुई है. अजरबैजान के मुताबिक पहले आर्मेनिया ने हमला किया उसके बाद उसकी सेना ने कार्रवाई की और हमले का जवाब दिया फिर अजरबैजान ने तुर्की से मिले घातक बायरकतार ड्रोन की मदद से आर्मीनिया के कई हथियारों को तबाह कर दिया और नागर्नो-कराबाख के कई इलाकों पर कब्‍जा कर लिया. लड़ाई में अब तक अर्मेनिया के 19 सैनिक घायल हो गए हैं. इनमें से 4 की हालत गंभीर है. इलाके में तैनात रूस की शांति सेना ने अजरबैजान के सैनिकों के तीन बार संघर्ष विराम उल्लंघन करने की जानकारी दी है.दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने वाले रूस ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान ने नागर्नो-कराबाख के विवादित इलाके में समझौते को तोड़ा है. इससे पहले अजरबैजान ने आरोप लगाया था कि आर्मीनिया के अवैध हथियारबंद समूहों ने हमला करके उनके 3 सैनिकों को मार गिराया है.

इससे पहले भी 6 हफ्ते तक भीषण जंग चली
इससे पहले साल 2020 में आर्मीनिया में करीब 6 हफ्ते तक भीषण जंग चली थी जिसमें 6500 से ज्‍यादा लोग मारे गए थे। इसके बाद रूस ने हस्‍तक्षेप किया और दोनों देशों के बीच सीजफायर कराया था. इस पूरे विवादित इलाके में रूस के कई शांतिरक्षक सैनिक तैनात हैं. रूस के रक्षा मंत्रायल ने एक बयान जारी करके कहा है कि अजरबैजान के हथियारबंद सैनिकों ने सीजफायर का उल्‍लंघन किया है.

नागोर्नो-करबाख कहा बसा है ?
अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच विवाद की जड़ नागोर्नो-करबाख का पहाड़ी इलाका है. करीब चार हजार वर्ग किमी. का ये पूरा इलाका पहाड़ी है, जहां तनाव की स्थिति बनी रहती है. इस क्षेत्र को अजरबैजान अपना हिस्सा बताता है. हालांकि साल 1994 में तीन साल के संघर्ष के बाद रूस ने दखल दिया और 1994 में सीज़फायर हुआ से और तबसे इस पर आर्मेनिया का कब्जा है. विवादित क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए दोनों देश अब तक दो लड़ाइया लड़ चुके है. अर्मेनिया के जिस क्षेत्र पर अजरबैजान ने हमला किया है. उस क्षेत्र में रूस की 2000 शांति सेना तैनात होती है. रूस ने अजरबैजान पर सीज फायर के उल्लंघन का आरोप लगाया है.दोनों ही देश सोवियत संघ (USSR) का हिस्सा रहे हैं, लेकिन 80 के दशक के आखिर में जब USSR का पतन शुरू हुआ तो उसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ा. ये पूरा विवाद नागरनो-काराबख इलाके के लिए है, जो अर्मेनिया और अज़रबैजान के बॉर्डर इलाके पर है।

US में उठता रहता है यह मसला
बता दें कि अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है. नागोर्नो-काराबाख़ में संघर्ष का मसला पहले भी कई बार US में उठता रहा है. साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को लेकर चार प्रस्ताव भी पास किए थे. हालाँकि, उनमें से कोई लागू नहीं किया जा सका. दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत की कोशिश की जाती रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.